Zen

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Friday, 6 November 2026

अनकही कहानी

 हर शाम वे उसी पुरानी बेंच पर बैठते थे, सूरज को पुराने पेड़ों के पीछे छुपते हुए देखा करते थे।

एक हमेशा चाय के दो प्याले लाता था। दूसरा कभी वजह नहीं पूछता।

वक़्त गुज़रता गया। लोग बदलते गए। बेंच भी पुरानी होती गई।

एक शाम उनमें से एक नहीं आया।

दूसरे ने हमेशा की तरह बेंच पर चाय के दो प्याले रख दिए। चाय ठंडी हो गई।

एक अजनबी ने पूछा, “क्या आप किसी का इंतज़ार कर रहे हैं?”

वह हल्के से मुस्कुराया।

“नहीं... बस एक वादा निभा रहा हूँ।”

 और उसके पास की ख़ाली जगह, बेचैन थी।

 

~ डॉ. इन्ताज मलेक



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